September 21, 2020

Teachers Day Essay in Hindi (टीचर डे) शिक्षक दिवस पर निबंध

Teachers Day Essay in Hindi (टीचर डे) शिक्षक दिवस पर निबंध: As we all know, human life is incomplete without a teacher. Teachers are very important contributors to our lives. Teacher / Guru we have precious gift given by God. Through his skill, knowledge and experience, he has made tireless efforts to make man successful. Teachers with their skill, knowledge and confidence help us to follow the guidelines by motivating us to succeed. Teacher’s Day is celebrated to know the importance of teacher in student life and to equate teachers. In the world, Teacher’s Day is celebrated on 05 October whereas in India, Teacher’s Day is celebrated on 05 September. Because the birthday of Dr. Sarvepalli Radhakrishnan, former President of India, is September 05. Therefore, in India, Teachers’ Day is celebrated only on 05 September.

Teachers Day Essay In Hindi

Essay On Teachers Day in Hindi (टीचर डे) शिक्षक दिवस पर निबंध

Essay On Teachers Day in Hindi (टीचर डे) शिक्षक दिवस पर निबंध: आज के इस लेख में शिक्षक दिवस पर हिंदी निबंध (Teachers Day Nibandh) लिखा गया हैं | Essay on Teacher Days in Hindi कक्षा 03 से 12वी के छात्रों के लिए | इस निबंध में शिक्षक दिवस कब व क्यों मनाया जाता हैं , महत्व, आदि के बारे में वर्णन किया हैं |

हमारे देश में हर वर्ष 05 सितम्बर को शिक्षक दिवस मनाया जाता हैं | इस दिन सभी विद्यालयों, कोलेजों को सजाया जाता हैं तथा विभिन्न, विशेष कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं | कार्यक्रमों में छात्र व शिक्षक पुरे उत्साह के साथ भूमिका अदा करते हैं |

Teachers Day 2020 शिक्षक दिवस टीचर डे: शिक्षक दिवस प्रति वर्ष 05 सितम्बर को बड़े हर्षोल्लास व ख़ुशी के साथ मनाया जाता हैं | विद्यार्थी, शिष्य के जीवन में सफलता के पीछे शिक्षक (गुरूजी) का होना आवश्यक हैं | किसी भी देश के भविष्य को सवारने के लिए अच्छे व गुणवान शिक्षको की भूमिका होती हैं | शिक्षक हमे विद्यार्थी जीवन समय में सही मार्ग की और अग्रसर करता हैं | गुरु शिष्य की परम्परा प्राचीन काल से चली आ रही हैं | पुराणों व धर्म ग्रंथो की मान्यता हैं, गुरु के बिना मानव जीवन अधुरा हैं | गुरु (शिक्षक) बानाने के लिए किसी जाती या वर्ण को नही देख जाता | धार्मिक व परम्पराओ के अनुसार एक शिक्षक का उत्तर दायित्व होता हैं कि वह अपनी शिक्षा व ज्ञान से शिष्य के जीवन में अज्ञान रूपी अधेरा को दूर कर एक ज्ञान रूपी प्रकाश की दीपक जला दे | शिक्षक अपने शिष्य को विभिन्न प्रयासों से एक आदर्श नागरिक बना देता हैं |

5 सितम्बर को हमारे देश में शिक्षकों के मान-सम्मान के रूप में शिक्षक दिवस मनाया हैं | इस दिन भारत के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ॰ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म दिन भी हैं | उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय एक शिक्षक (Teacher) के रूप में बिताया | उनके शिक्षा प्रेम और विद्वता की मिशाल के कारण भारत देश में उनके जन्म दिन 05 सितम्बर को “शिक्षक दिवस” का रूप प्रदान कर दिया | कहा जाता हैं, की ” गुरु बिना ज्ञान नही, और ज्ञान बिना मुक्ति नही “ अथार्त गुरु के बिना ज्ञान असम्भव हैं | अगर हो भी जाए तो फलदायक नही होगा | यह मान्यता कुछ हद तक सही हैं, जब व्यक्ति जो किताबों के माध्यम से पढता हैं उससे केवल मात्र शब्द ज्ञान होता हैं न की अर्थ ज्ञान | अर्थ ज्ञान के लिए मनुष्य को गुरु की आवश्यकता होती हैं | बिना अर्थ ज्ञान के अभाव में मनुष्य जीवन उस गधे के समान होता हैं, जो पीठ पर लदे चन्दन की लकड़ी को केवल भार समझता हैं | चन्दन के गुणों को नही जानता| भारत -शिक्षा के लिए प्राचीन काल से ही विश्व में प्रसिध्द रहा हैं | और भारत को विश्व का गुरु भी कहा जाता हैं |

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